
3 दिसंबर है और 3 दिसंबर को विश्व दिव्यांग दिवस मनाया जाता है। आज के दिन दिव्यांगजनों को सम्मान दिया जाता हैं। सरकार नए नए योजनाएं दिव्यागों के लिए आज के दिन लेकर आते है योजनाओं का शुभारंभ किया जाता हैं। लेकिन हमारा छत्तीसगढ़ प्रदेश एक ऐसा प्रदेश है जहां दिव्यांग दिवस के दिन दिव्यांगजनों पर पुलिस बर्बरता करती है। *दिव्यागों के साथ बर्बरता क्यों होता है चलिए आपको बताते हैं* छत्तीसगढ़ दिव्यांग सेवा संघ अपने 6 सूत्रीय मांगों को लेकर सालों से सरकार के नेता मंत्रियों और प्रशासन में बैठे अधिकारियों के चक्कर लगा रहे हैं।
इनके मांगे भी जायज है।500 रुपए प्रतिमाह पेंशन दिया जाता है उसमें वृद्धि करना, फर्जी दिव्यांग प्रमाण पत्र के जरिए सरकारी नौकरी कर रहे लोगों की जांच कर कार्रवाई करना तोह ऐसे 6 सूत्रीय मांग है। जिसे लेकर दिव्यागंजन राजधानी पहुंचते हैं तो पुलिस विभाग से उन्हें प्रदर्शन आंदोलन करने की अनुमति नहीं दी जाती है। लेकिन आपको पता होगा कि यह लोकतांत्रिक देश है। और लोकतंत्र में सभी को अपनी बात रखने का अधिकार है। लेकिन पुलिस प्रशासन को इनका आंदोलन करना रास नहीं आता जब भी ये प्रदर्शन करने या ज्ञापन सौंपने आते हैं तो पुलिस कभी इन्हें हाउस अरेस्ट कर देती है तो कभी बसों में भरकर तूता धरना स्थल में छोड़ देती है। बसों में भरने के दौरान झूमाझटकी होती है।
कई बार तो दिव्यागों को गंभीर चोटे भी आई हैं। कुछ ऐसा ही ही आज भी हुआ जब दिव्यांगजन रायपुर के तेलीबांधा पहुंचे तो पुलिस उन्हें सिटी बस में भरकर इधर उधर घुमाती रही और बाद में पुलिस लाईन के परेड मैदान में रोक कर रखे रहे। कारण सिर्फ इतना था कि वो लोग सरकार से अपना हक मांगने आए थे। लगता है लोकतंत्र में अपना हक मांगना अपना अधिकार मांगना अपराध है। और वहीं दूसरे ओर सरकार विश्व दिव्यांग दिवस मना रही थी दिव्यागों का सम्मान कर रही थी। और राजधानी में दिव्यागों को बस में बंधक बनाकर गली गली घुमाया जा रहा है।




