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छत्तीसगढ़ साहित्य जगत को अपूरणीय क्षति, विनोद कुमार शुक्ल पंचतत्व में हुए विलीन

रायपुर।छत्तीसगढ़ और देश के साहित्य जगत के लिए आज का दिन अत्यंत शोकपूर्ण रहा। प्रदेश के सुप्रसिद्ध साहित्यकार, ज्ञानपीठ पुरस्कार से सम्मानित विनोद कुमार शुक्ल का अंतिम संस्कार आज रायपुर स्थित मारवाड़ी श्मशान घाट में पूरे राजकीय सम्मान और भावुक माहौल के बीच संपन्न हुआ। उनके अंतिम दर्शन के लिए समाज के वरिष्ठ नेता, पत्रकार, साहित्यकार, प्रशासनिक अधिकारी और बड़ी संख्या में नागरिक उपस्थित रहे। उनका अंतिम संस्कार राजकीय सम्मान के साथ किया गया।

विनोद कुमार शुक्ल का जन्म 1 जनवरी 1937 को हुआ था। उन्होंने 23 दिसंबर 2025 को रायपुर के एम्स अस्पताल में अंतिम सांस ली। वे लंबे समय से अस्वस्थ थे, लेकिन साहित्य के प्रति उनका प्रेम अंत तक बना रहा। तबीयत खराब होने के दौरान उनका यह कथन — “मैं सिर्फ जीना चाहता हूं, लिखने के लिए” — उनके साहित्यिक जीवन और समर्पण को सदा के लिए अमर कर गया।

अंतिम संस्कार में रायपुर के पूर्व महापौर प्रमोद दुबे, रायपुर सांसद बृजमोहन अग्रवाल, रायपुर पश्चिम के पूर्व विधायक विकास उपाध्याय, भाजपा नेता गौरीशंकर श्रीवास सहित कई वरिष्ठ जनप्रतिनिधि मौजूद रहे। साथ ही रायपुर कलेक्टर गौरव सिंह भी श्रद्धांजलि देने पहुंचे।

इस अवसर पर पूर्व महापौर प्रमोद दुबे ने कहा,
“विनोद कुमार शुक्ल सिर्फ एक व्यक्ति नहीं, बल्कि एक विचारधारा हैं। आने वाली पीढ़ियों में भी उनकी संवेदनशील सोच और लेखन जीवित रहेगा।”

भाजपा नेता गौरीशंकर श्रीवास ने कहा कि वे भविष्य में सरकार से विनोद कुमार शुक्ल के नाम से शोध पीठ बनने की मांग करेंगे, ताकि नई पीढ़ी उनके साहित्य से प्रेरणा ले सके।

लोकसभा सांसद बृजमोहन अग्रवाल ने शोक व्यक्त करते हुए कहा,
“निश्चित ही आज का दिन छत्तीसगढ़ के साहित्य क्षेत्र के लिए अत्यंत दुखद है। विनोद कुमार शुक्ल का जाना प्रदेश ही नहीं, पूरे देश के साहित्य जगत के लिए एक बहुत बड़ी क्षति है।”

विनोद कुमार शुक्ल
अपनी सरल भाषा, गहरी संवेदना और मानवीय सरोकारों से भरे लेखन के लिए जाने जाते थे। उनकी कविताएं, कहानियां और उपन्यास आने वाली पीढ़ियों को सदैव मार्गदर्शन देते रहेंगे। उनका जाना एक युग का अंत है, लेकिन उनका साहित्य उन्हें हमेशा जीवित रखेगा।

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