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Chhattishgarh Shilpkala: शिल्पकार हीराबाई झरेका बघेल राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार से हुई सम्मानित धातुकला में रहा उत्कृष्ट योगदान

रायपुर। नई दिल्ली के विज्ञान भवन में छत्तीसगढ़ की शिल्पकार हीराबाई झरेका बघेल को धातुकला में उत्कृष्ट योगदान के लिए सम्मानित किया गया। राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने राष्ट्रीय हस्तशिल्प पुरस्कार देकर उन्हें सम्मानित किया।

हीराबाई झरेका बघेल कौन हैं ?

हीराबाई झरेका बघेल सारंगढ़-बिलाईगढ़ जिले की वनांचल ग्राम पंचायत बैगीनडीह गांव की रहने वाली हैं। वे ढोकरा कला की शानदार शिल्पकार हैं। उन्होंने अपने पिता भुलाऊ झरेका और पति मिनकेतन बघेल से ये कला सीखी है। साल 2011-12 के लिए छत्तीसगढ़ सरकार ने भी उन्हें सम्मानित किया। उनके पति मिनकेतन बघेल को भी वर्ष 2006-07 में छत्तीसगढ़ शासन द्वारा सम्मानित किया गया था।

ढोकरा कला क्या है

ढोकरा कला के बारे में कहा जाता है कि यह छत्तीसगढ़ की सदियों पुरानी धरोहर है। झरेका बघेल उन शिल्प कलाकारों में से हैं जिन्होंने इन परंपराओं को आधुनिक समय के अनुरूप जीवंत बनाए रखने का काम किया है।

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