सारसमाल में कर्मा पूजा महोत्सव में शामिल हुए मुख्यमंत्री विष्णु देव साय, मांदर की थाप पर किया पारंपरिक नृत्य

रायगढ़। मुख्यमंत्री विष्णु देव साय ने कहा कि आदिवासी समाज का इतिहास शौर्य, स्वाभिमान, संघर्ष और प्रकृति संरक्षण की गौरवशाली परंपराओं से जुड़ा है। जनजातीय संस्कृति में जल, जंगल और जमीन के संरक्षण का विशेष महत्व है, जो पूरे देश के लिए प्रेरणादायी है। उन्होंने कहा कि शिक्षा समाज की प्रगति का सबसे सशक्त माध्यम है और युवाओं को बड़े लक्ष्य निर्धारित कर आगे बढ़ना चाहिए।

मुख्यमंत्री विष्णु देव साय गुरुवार को रायगढ़ जिले के तमनार विकासखंड अंतर्गत ग्राम सारसमाल में आयोजित कर्मा पूजा महोत्सव में शामिल हुए। उरांव समाज विकास समिति, छत्तीसगढ़-ओडिशा हिमगिर क्षेत्र द्वारा आयोजित इस कार्यक्रम में उन्होंने भगवान करम देव तथा भगवान शिव और माता पार्वती की पूजा-अर्चना कर प्रदेश की सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की।मांदर की थाप पर मुख्यमंत्री ने किया कर्मा नृत्यकर्मा पूजा महोत्सव में जनजातीय लोक संस्कृति की आकर्षक झलक देखने को मिली। कर्मा दलों के आग्रह पर मुख्यमंत्री स्वयं मांदर लेकर समाजजनों के बीच पहुंचे और महिला-पुरुषों के साथ पारंपरिक कर्मा नृत्य किया। मुख्यमंत्री की सहभागिता से कार्यक्रम में उत्साह का माहौल रहा। पारंपरिक वेशभूषा में सजे समाजजनों ने मांदर, मृदंग और ढोल की थाप पर सामूहिक नृत्य प्रस्तुत किया।
मुख्यमंत्री ने कहा कि कर्मा पर्व प्रकृति के प्रति कृतज्ञता, नई फसल की खुशी और सामाजिक एकजुटता का प्रतीक है। ऐसे आयोजन नई पीढ़ी को अपनी भाषा, संस्कृति, परंपराओं और सामाजिक मूल्यों से जोड़ने में महत्वपूर्ण भूमिका निभाते हैं।
जनजातीय महापुरुषों का योगदान हमारी अमूल्य विरासतमुख्यमंत्री साय ने भगवान बिरसा मुंडा, शहीद वीर नारायण सिंह और गुंडाधुर सहित जनजातीय महापुरुषों के योगदान को याद करते हुए कहा कि इन वीरों ने मातृभूमि, स्वाभिमान और अधिकारों की रक्षा के लिए संघर्ष किया। उनके त्याग और बलिदान से नई पीढ़ी को परिचित कराना सभी की जिम्मेदारी है।उन्होंने कहा कि पूर्व प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में अलग जनजातीय कार्य मंत्रालय का गठन किया गया। वहीं, प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में जनजातीय समाज के सम्मान, शिक्षा, स्वास्थ्य, आवास, सड़क, पेयजल और आजीविका जैसी सुविधाओं के विस्तार के लिए कार्य किए जा रहे हैं।
मुख्यमंत्री ने राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु का उल्लेख करते हुए कहा कि देश के सर्वोच्च संवैधानिक पद पर जनजातीय समाज की बेटी का पहुंचना समाज के सम्मान और भागीदारी का प्रतीक है। उन्होंने नया रायपुर स्थित जनजातीय संग्रहालय को जनजातीय इतिहास, संस्कृति और परंपराओं से नई पीढ़ी को परिचित कराने का महत्वपूर्ण माध्यम बताया।शिक्षा और रोजगार के अवसरों का लाभ उठाएं युवामुख्यमंत्री ने युवाओं से शिक्षा को प्राथमिकता देने और प्रतियोगी परीक्षाओं, उच्च शिक्षा तथा रोजगार के अवसरों का अधिकतम लाभ उठाने का आह्वान किया। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार आदिवासी विद्यार्थियों को गुणवत्तापूर्ण शिक्षा और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी के लिए बेहतर सुविधाएं उपलब्ध कराने का प्रयास कर रही है।उन्होंने प्रयास आवासीय विद्यालयों और नालंदा परिसर जैसी अध्ययन सुविधाओं का उल्लेख करते हुए कहा कि युवाओं को राष्ट्रीय स्तर के प्रतिष्ठित शिक्षण संस्थानों में प्रवेश के लिए भी प्रयास करना चाहिए। दिल्ली में जनजातीय विद्यार्थियों के लिए छात्रावास की क्षमता बढ़ाकर 200 सीट किए जाने की जानकारी भी उन्होंने दी।मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार युवाओं को कौशल विकास, रोजगार मेलों, शासकीय भर्ती और औद्योगिक गतिविधियों के माध्यम से रोजगार के अवसरों से जोड़ने पर जोर दे रही है। युवाओं को उपलब्ध योजनाओं की जानकारी लेकर उनका लाभ उठाना चाहिए।
जनजातीय क्षेत्रों में बुनियादी सुविधाओं का विस्तारमुख्यमंत्री साय ने कहा कि केंद्र और राज्य सरकार जनजातीय बहुल क्षेत्रों में विकास की सुविधाएं पहुंचाने के लिए प्रतिबद्ध हैं। धरती आबा जनजातीय ग्राम उत्कर्ष अभियान और प्रधानमंत्री जनजाति आदिवासी न्याय महाअभियान (पीएम-जनमन) के माध्यम से आवास, सड़क, पेयजल सहित विभिन्न मूलभूत सुविधाओं का विस्तार किया जा रहा है।उन्होंने कहा कि सरकार का उद्देश्य दूरस्थ जनजातीय क्षेत्रों में रहने वाले प्रत्येक परिवार तक विकास योजनाओं का लाभ पहुंचाना है, ताकि कोई भी परिवार बुनियादी सुविधाओं से वंचित न रहे।
कार्यक्रम में राज्यसभा सांसद देवेंद्र प्रताप सिंह ने जनजातीय संस्कृति, परंपराओं और लोककलाओं को संरक्षित रखने की आवश्यकता पर जोर दिया। उन्होंने युवाओं से शिक्षा को प्राथमिकता देने और सामाजिक एकता मजबूत करने का आह्वान किया।उरांव समाज विकास समिति के अध्यक्ष पनत राम भगत ने स्वागत उद्बोधन में कर्मा पर्व की परंपरा, उरांव समाज की भाषा, संस्कृति और लोककलाओं की विशेषताओं पर प्रकाश डाला।कर्मा पूजा महोत्सव में बड़ी संख्या में समाजजन शामिल हुए। पारंपरिक गीत-संगीत और सामूहिक नृत्य के माध्यम से जनजातीय समाज की सांस्कृतिक विरासत, प्रकृति के प्रति आस्था और सामाजिक एकजुटता का संदेश दिया गया।




