छत्तीसगढ़रायपुर

‘बिहान’ की छांव और पक्के इरादों ने बदली तस्वीर मछली पालन से हर महीने 10 हज़ार रुपये की कमाई कर ‘लखपति दीदी’ बनीं सारंगढ़ की भुनेश्वरी

रायपुर,18 अक्टूबर 2026/सीमित आर्थिक संसाधन और तंगहाली के बीच परिवार चलाना किसी चुनौती से कम नहीं होता। लेकिन जब बुलंद हौसलों को शासन की योजनाओं का संबल मिल जाए, तो जिंदगी की दिशा और दशा दोनों बदल जाती हैं। छत्तीसगढ़ के सारंगढ़- बिलाईगढ़ जिले के ग्राम धनगांव की रहने वाली भुनेश्वरी ने अपनी मेहनत और छत्तीसगढ़ राज्य ग्रामीण आजीविका मिशन (बिहान) के सहयोग से यह साबित कर दिखाया है। आज वे मछली पालन के जरिए प्रतिमाह 10 हजार रुपए की आमदनी अर्जित कर रही हैं और क्षेत्र की अन्य महिलाओं के लिए एक मिसाल बन चुकी हैं।

*​स्वयं सहायता समूह से जुड़ी उम्मीद की किरण*

​भुनेश्वरी वंदना स्वयं सहायता समूह से जुड़ी थीं। मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय के नेतृत्व में ग्रामीण महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए चलाई जा रही ‘बिहान’ योजना ने उनके जीवन में नया सवेरा ला दिया। योजना के तहत उन्हें समूह के माध्यम से 60 हजार रुपए की सामुदायिक सहायता और 15 हजार रुपए का ऋण प्राप्त हुआ।

*​स्वरोजगार की ओर पहला कदम*

​इस आर्थिक सहयोग से भुनेश्वरी ने अपने सपनों को साकार करते हुए मछली पालन का व्यवसाय शुरू किया। उन्होंने न केवल इस व्यवसाय को अपनाया, बल्कि अपनी कड़ी मेहनत, लगन और बेहतर प्रबंधन से इसे मुनाफे का सौदा बना दिया। आज इस स्वरोजगार के बल पर वे हर महीने लगभग 10 हजार रुपए कमा रही हैं।

*​महिलाओं के आर्थिक सशक्तिकरण की बानगी*

​जिला प्रशासन के सतत् प्रयासों और ग्रामीण महिलाओं को आजीविका गतिविधियों से जोड़ने की पहलों का परिणाम है कि भुनेश्वरी जैसी महिलाएं आज खुद के पैरों पर खड़ी हो पा रही हैं। ‘लखपति दीदी’ के रूप में उनकी यह सफलता यह संदेश देती है कि सरकारी योजनाओं का सही मार्गदर्शन और महिला की खुद की जिद, ग्रामीण आंचल की तस्वीर बदलने के लिए पर्याप्त है।

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