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मातृ-नवजात मृत्यु दर घटाने की तैयारी, ‘सुमन रोडमैप 2030’ पर मंथन रायपुर में राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित, 12 हाई-फोकस जिलों में स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर जोर

रायपुर, 15 अक्टूबर 2026। छत्तीसगढ़ में मातृ एवं नवजात मृत्यु दर को न्यूनतम स्तर पर लाने और स्वास्थ्य सेवाओं की गुणवत्ता में सुधार करने के उद्देश्य से राजधानी रायपुर में ‘सुमन (सुरक्षित मातृत्व आश्वासन) रोडमैप 2030’ पर एक दिवसीय राज्य स्तरीय कार्यशाला आयोजित की गई। स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण विभाग द्वारा अंतरराष्ट्रीय संस्था झपाइगो (JHPIEGO) के तकनीकी सहयोग से आयोजित इस कार्यशाला में वर्ष 2030 तक मातृ एवं शिशु मृत्यु दर में उल्लेखनीय कमी लाने की रणनीतियों पर चर्चा की गई।होटल बेबीलोन इंटरनेशनल में आयोजित इस कार्यशाला का संचालन स्वास्थ्य सेवाओं के आयुक्त सह संचालक एवं राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, छत्तीसगढ़ के मिशन संचालक संजीव कुमार झा के निर्देशन में किया गया।

संयुक्त संचालक (मातृ स्वास्थ्य) डॉ. निर्मला यादव और उपसंचालक डॉ. स्मृति देवांगन के नेतृत्व में विशेषज्ञों ने मातृ स्वास्थ्य कार्यक्रमों की समीक्षा करते हुए कार्ययोजना को जमीनी स्तर पर प्रभावी ढंग से लागू करने पर जोर दिया।12 प्राथमिकता वाले जिलों पर विशेष फोकसकार्यशाला में प्रदेश के 12 हाई-फोकस जिलों—बेमेतरा, बीजापुर, धमतरी, दंतेवाड़ा, कांकेर, खैरागढ़-छुईखदान-गंडई, कोंडागांव, महासमुंद, मोहला-मानपुर-अंबागढ़ चौकी, नारायणपुर, राजनांदगांव और सरगुजा में मातृ स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत करने पर विशेष ध्यान दिया गया।इन जिलों की प्रथम संदर्भन इकाइयों (FRU), जिला अस्पतालों (DH) और सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्रों (CHC) में गुणवत्तापूर्ण स्वास्थ्य सुविधाओं का विस्तार करने के साथ जिला स्तर पर ठोस कार्ययोजना तैयार करने पर चर्चा हुई।सुरक्षित प्रसव और आपातकालीन उपचार पर जोरकार्यशाला में गर्भवती महिलाओं की प्रसव पूर्व जांच (ANC), संस्थागत प्रसव और प्रसवोत्तर देखभाल (PNC) को सुरक्षित एवं प्रभावी बनाने को प्राथमिकता दी गई।

इसके साथ ही जटिल प्रसव और आपातकालीन परिस्थितियों में समय पर उपचार सुनिश्चित करने के लिए फर्स्ट रेफरल यूनिट्स (FRU) को सुदृढ़ करने की रणनीति पर विचार किया गया।विशेषज्ञों ने जिला स्तर पर स्वास्थ्य विभाग की जवाबदेही बढ़ाने, विभिन्न विभागों के बीच बेहतर समन्वय स्थापित करने तथा तकनीकी विशेषज्ञता और सामुदायिक सहभागिता को मजबूत करने की आवश्यकता भी बताई।

मेडिकल कॉलेजों और अंतरराष्ट्रीय संस्थाओं की सहभागिताइस राज्य स्तरीय कार्यशाला में एम्स रायपुर के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभागाध्यक्ष, प्रदेश के 10 शासकीय और 5 निजी मेडिकल कॉलेजों के विभागाध्यक्ष, सभी जिलों के मुख्य चिकित्सा एवं स्वास्थ्य अधिकारी (CMHO), जिला एवं ब्लॉक स्तर के आरसीएच नोडल अधिकारी तथा FOGSI के प्रतिनिधियों ने भाग लिया।

इसके अलावा WHO, UNICEF, JHPIEGO, Nutrition International, KPMG, IPAS, Piramal Foundation, Wadhwani AI, Azim Premji Foundation, ARMANN और YosAid सहित विभिन्न सहयोगी संस्थाओं के राज्य प्रमुख भी शामिल हुए।कार्यशाला में विशेषज्ञों ने अपने अनुभव और सफल कार्य-पद्धतियां साझा कीं। सभी प्रतिभागियों ने समन्वित प्रयासों के माध्यम से वर्ष 2030 तक मातृ एवं नवजात स्वास्थ्य सेवाओं को बेहतर बनाने तथा मृत्यु दर में ऐतिहासिक कमी लाने की दिशा में काम करने का संकल्प लिया।

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