
रायपुर/01 अक्टूबर 2026। प्रदेश कांग्रेस मुख्यालय राजीव भवन रायपुर में प्रदेश कांग्रेस चिकित्सा प्रकोष्ठ के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता, प्रदेश कांग्रेस संचार विभाग अध्यक्ष सुशील आनंद शुक्ला, शहर जिला कांग्रेस अध्यक्ष कुमार शंकर मेनन ने संयुक्त पत्रकार वार्ता को संबोधित करते हुये कहा कि
*1. सरकार के द्वारा मंत्री की पत्नी से जुड़ी कंपनी को असामान्य लाभ पहुंचाया गया*
मंत्री केदार कश्यप की पत्नी श्रीमती शान्ति कश्यप की राधिका पैलेस प्राइवेट लिमिटेड जिसमें वो निदेशक हैं, की लगभग 1.33 एकड़ मूल भूमि खसरा क्र. 658/2 नालापारा बस्ती, कचना की संकरी सड़क पर स्थित है। जहाँ पहुँचने का रास्ता मुश्किल से 6-7 फीट ही चौड़ा है। निश्चित रूप से जमीन की कीमत कुछ लाख तक ही सीमित है। MR-43 नगर विकास योजना के तहत RDA द्वारा भू-स्वामियों से मूल भूमि अधिग्रहित कर, बदले में कथित विकास के बाद 40 प्रतिशत भूमि लौटाने का प्रावधान किया गया है।
मूल भूमि के बदले लगभग 23,327 वर्गफीट का अंतिम भूखंड प्लाट क्रमांक 25, बलौदा बाजार रोड पर, सड्डू चौक से कुछ दूर, MR-43 जैसी 45 मीटर/150 फीट चौड़ी सड़क पर दिया जाना अंतिम प्लाट के रूप में RDA की वेबसाइट पर अंकित है (नगर विकास योजना के रायपुर विकास प्राधिकरण द्वारा जारी स्पष्टीकरण में प्रस्तावित कहा गया है)। इस प्लाट की कीमत सड़क निर्माण के पश्चात 20 करोड़ रुपये से ज्यादा ही होगा।
जिस स्थान पर अंतिम प्लॉट क्रमांक 25 दिया गया है, वह रायपुर-बलौदाबाजार रोड पर ग्राम सड्डू के एक अत्यंत महत्वपूर्ण व्यावसायिक चौक से लगभग 200 मीटर की दूरी पर स्थित है। चौक पर NEXA और ŠKODA के शोरूम, सामने रॉयल कैसल होटल, एक ओर वैदिक इंटरनेशनल स्कूल तथा दूसरी ओर ब्रह्माकुमारी संस्थान का शांति सरोवर स्थित हैं। अंतिम प्लॉट क्र. 25 के पीछे से निकलने वाली सड़क एलिमेंटस नामक आवासीय परिसर के बिल्कुल पीछे से होकर इस महत्वपूर्ण व्यावसायिक क्षेत्र से जुड़ेगी। कचना की संकरी सड़क पर स्थित भूमि के बदले सड्डू में डत्-43 जैसी 45 मीटर/150 फीट चौड़ी प्रस्तावित मुख्य सड़क के पास अंतिम भूखंड क्यों दिया गया?
2. मूल भूमि और अंतिम भूखंड के बीच लगभग एक किलोमीटर की दूरी पर सवाल*छत्तीसगढ़ नगर तथा ग्राम निवेश अधिनियम, 1973 की धारा 50(3)(ii) में प्रारूप योजना की विषय-वस्तु के संबंध में यह प्रावधान है:50(3)(ii) “एक प्रारूप योजना, जैसा कि आवश्यक हो, में निम्नलिखित विवरण सम्मिलित होंगे, जैसे कि,-(च) अंतिम भूखंड को तैयार करने के लिए वास्तविक भूखंड की सीमाओं में परिवर्तन कर उसका पुनर्गठन, यदि आवश्यक हो तो;(छ) आस-पास के किसी भूखंड के हस्तांतरण द्वारा वास्तविक भूखंड से अंतिम भूखंड तैयार करना।”यानी जो मूल भूखंड भू-स्वामी से लिया जाएगा और जो भू-भाग कथित विकास के बाद उसे लौटाया जाएगा वह मूल भू-खंड से लगा हुआ अंतिम भूखंड होना चाहिए। यह नहीं हो सकता कि मूल भूखंड कहीं दूसरी जगह और अंतिम भूखंड कहीं दूसरी जगह हो। परन्तु निश्चित तौर पर प्रभावी मंत्री की पत्नी की कंपनी को फायदा पहुचाने के लिए नियमों को ताक पर रख कर भ्रष्टाचार किया गया। इस योजना में हो रहे भ्रष्टाचार को लेकर छत्तीसगढ़ शासन के मुख्य सचिव को दो पत्र भेजे गए हैं इसपर अभी तक कोई कार्यवाही नहीं हुई है जो अपेक्षित है।सवाल: किस वैधानिक प्रावधान के आधार पर मूल भूखंड से इतनी दूर अंतिम भूखंड दिया गया है?
*3. नालापारा की संकरी पहुँच वाली भूमि के बदले मुख्य सड़क की प्राइम लोकेशन क्यों?*कंपनी की मूल भूमि तक पहुँच वाली एकमात्र संकरी सड़क जो कि 10 फीट से कम है, बस्ती से ही उपलब्ध है। कुछ लाख की ज़मीन को 20 करोड़ की ज़मीन में बदलने को भ्रष्टाचार और पद के दुरुपयोग का मामला क्यों न माना जाए?सवाल: जब योजना में 12 मीटर चौड़ी आंतरिक सड़कें भी प्रस्तावित हैं, तो अंतिम भूखंड वहाँ या मूल भूमि से जुड़ा हुआ देने के बजाय 150 फीट की MR-43 सड़क पर क्यों दिया गया? यह भारी भ्रष्टाचार का सीधा प्रमाण है।
*4. कंपनी की जमीन को योजना में शामिल करने की आवश्यकता ही क्या थी?*सवाल: क्या बिना कंपनी की जमीन को शामिल किए योजना नहीं बन सकती थी? RDA बताए कि इस विशेष 1.33 एकड़ भूमि को नगर विकास योजना में शामिल करना क्यों अपरिहार्य हुआ?
5. कंपनी की मूल जमीन पर सार्वजनिक सुविधाएं और बदले में प्राइम प्लॉट-इस निर्णय का आधार क्या?*नालापारा की मूल भूमि जो कि प्रस्तावित 150 फीट की MR-43 सड़क से लगभग 300 फीट की दूरी पर अन्दर की ओर स्थित है, को योजना में सार्वजनिक सुविधाओं के लिए शामिल किया गया है और उसके बदले महत्वपूर्ण व्यावसायिक चौक के पास नियमों के विपरीत अंतिम भूखंड आबंटित हुआ।सवाल: सार्वजनिक सुविधाओं के लिए इसी जमीन का चयन किस जमीनी सर्वे की तकनीकी रिपोर्ट, योजना मापदंड या आवश्यकता के आधार पर हुआ?
*कांग्रेस के सवाल और मांग*
1. मंत्री केदार कश्यप मंत्रिमंडल से इस्तीफ़ा दें। भ्रष्टाचार साबित होने पर मंत्री केदार कश्यप, उनकी पत्नी और संबंधित अधिकारियों पर भ्रष्टाचार व शासकीय पद के दुरुपयोग का मामला दर्ज हो।
2. MR-43 नगर विकास योजना में अंतिम प्लॉट आवंटन के मुद्दे की स्वतंत्र एवं निष्पक्ष उच्चस्तरीय जाँच कराई जाए, तो व्यापक भ्रष्टाचार के प्रमाण उजागर हो सकते हैं।
3. जाँच पूरी होने तक इस नगर के कथित विकास की इस योजना को अंतिम रूप देने अथवा इसके आधार पर आगे कोई भी कार्रवाई करने पर तत्काल रोक लगाई जाए।
4. इस भ्रष्टाचार को अमलीजामा पहनाने के लिए रायपुर विकास प्राधिकरण द्वारा जल्दबाजी एवं हड़बड़ी में कार्रवाई की जा रही है।
5. पहला सवाल यह है कि अगर सरकार का उद्देश्य नई राजधानी के रूप में नया रायपुर को विकसित करने की है, तो कचना-लाभांडी-सड्डू के इलाक़े में यह योजना क्यों लाई गई है।
6. अगर रायपुर विकास प्राधिकरण (RDA) का गठन लाभ न कमाने के उद्देश्य से किया गया है, तो इस योजना से कमाए जाने वाले सैकड़ों करोड़ का उद्देश्य क्या है?




