
रायपुर/ छत्तीसगढ़ में आरक्षण का मुद्दा एक बार फिर गरमा गया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी ने दिसंबर 2022 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार के दौरान विधानसभा में सर्वसम्मति से पारित आरक्षण विधेयक को तत्काल लागू करने की मांग की है। कांग्रेस ने इस विधेयक को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल कराने की भी मांग उठाई है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के मुख्य प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने भाजपा सरकार पर सामाजिक न्याय और युवाओं के संवैधानिक अधिकारों की अनदेखी करने का आरोप लगाया है।
: कांग्रेस प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा के मुताबिक, दिसंबर 2022 में तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने विधानसभा में 32 प्रतिशत अनुसूचित जनजाति, 13 प्रतिशत अनुसूचित जाति, 27 प्रतिशत अन्य पिछड़ा वर्ग और ईडब्ल्यूएस के लिए आरक्षण का विधेयक सर्वसम्मति से पारित कराया था।
कांग्रेस का आरोप है कि भाजपा सरकार अब तक इस कानून को लागू नहीं कर पाई है, जिसके चलते प्रदेश के युवाओं को शिक्षा और सरकारी नौकरियों में आरक्षण का लाभ नहीं मिल पा रहा है।
सुरेंद्र वर्मा ने सुप्रीम कोर्ट के फैसले का हवाला देते हुए कहा कि 50 प्रतिशत से अधिक आरक्षण के लिए ठोस आधार प्रस्तुत करना जरूरी है, जबकि तत्कालीन कांग्रेस सरकार ने जस्टिस छबिलाल पटेल कमेटी के आंकड़ों के आधार पर ही विधेयक पारित किया था।
कांग्रेस ने भाजपा सरकार से सवाल किया है कि यदि केंद्र और राज्य में भाजपा की डबल इंजन सरकार है, तो इस आरक्षण विधेयक को संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल कराने के लिए पहल क्यों नहीं की जा रही है?
: कांग्रेस ने आरोप लगाया कि आरक्षण विधेयक लागू नहीं होने से सरकारी भर्तियां, चयन प्रक्रियाएं और उच्च शिक्षा में प्रवेश प्रभावित हो रहे हैं। पार्टी ने सरकार से 2022 में पारित आरक्षण विधेयक को तत्काल लागू करने और इसे संविधान की नौवीं अनुसूची में शामिल कराने की मांग की है।
अब देखना होगा कि कांग्रेस के इन आरोपों और मांगों पर भाजपा सरकार की ओर से क्या प्रतिक्रिया सामने आती है।




