
रायपुर। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के छत्तीसगढ़ दौरे से पहले प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष दीपक बैज ने उनसे पांच सवाल पूछे हैं। बैज ने नक्सल मुक्त घोषित गांवों को एक-एक करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि देने, जेलों में बंद आदिवासियों की रिहाई, नक्सल हिंसा पीड़ित परिवारों को मुआवजा और आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन से जुड़े अधिकारों को लेकर सरकार से जवाब मांगा है।दीपक बैज ने कहा कि गृह मंत्री अमित शाह ने बस्तर पंडुम 2025 के दौरान नक्सल मुक्त होने वाली पंचायतों को एक करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि देने का वादा किया था। जब केंद्र सरकार ने 31 मार्च 2026 तक देश से नक्सलवाद समाप्त होने का दावा किया है, तो अब तक नक्सल मुक्त घोषित पंचायतों को यह राशि क्यों नहीं दी गई?
उन्होंने गांवों की सूची सार्वजनिक करने की भी मांग की।बैज ने आरोप लगाया कि नक्सल सहयोगी बताकर 4 हजार से अधिक आदिवासी अब भी जेलों में बंद हैं। उन्होंने सवाल किया कि ऐसे आदिवासियों की रिहाई के लिए सरकार ने पिछले तीन वर्षों में क्या कदम उठाए हैं। साथ ही नक्सल हिंसा से प्रभावित परिवारों को मुआवजा और आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास का लाभ नहीं मिलने का मुद्दा भी उठाया।
प्रदेश कांग्रेस अध्यक्ष ने पोलावरम और बोधघाट परियोजनाओं का जिक्र करते हुए कहा कि आदिवासियों की सहमति, पुनर्वास और मुआवजे के बिना उन्हें विस्थापन की स्थिति में धकेला जा रहा है। उन्होंने बोधघाट परियोजना से प्रभावित 56 गांवों की ग्राम सभाओं से चर्चा करने और नदियों में औद्योगिक प्रदूषण रोकने को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा।
दीपक बैज के गृह मंत्री अमित शाह से पांच सवाल:
1. नक्सल मुक्त घोषित गांवों को एक-एक करोड़ रुपये की प्रोत्साहन राशि कब तक दी जाएगी और इन गांवों की सूची सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही है?
2. नक्सल सहयोगी बताकर जेलों में बंद निर्दोष आदिवासियों की रिहाई के लिए सरकार ने क्या कदम उठाए हैं?
3. नक्सल हिंसा पीड़ित परिवारों और आत्मसमर्पण करने वाले नक्सलियों के पुनर्वास के लिए शुरू की गई योजनाओं को कमजोर क्यों किया गया?
4. पेसा कानून और पांचवीं अनुसूची के संवैधानिक प्रावधानों की अनदेखी कर बस्तर के जंगलों और खनिज संसाधनों को कॉरपोरेट घरानों को सौंपने के आरोपों पर सरकार क्या जवाब देगी?5. पिछली कांग्रेस सरकार के दौरान आदिवासियों पर दर्ज कथित झूठे मामलों की समीक्षा के लिए बनाई गई समिति की कार्रवाई बंद क्यों पड़ी है?
बैज ने हसदेव, तमनार, नंदराज पर्वत और बैलाडीला का उल्लेख करते हुए भाजपा सरकार पर आदिवासियों के संसाधनों के दोहन का आरोप लगाया। उन्होंने नगरनार स्टील प्लांट के विनिवेश से जुड़े मुद्दे पर भी गृह मंत्री से जवाब मांगा।दीपक बैज ने कहा कि बस्तर से सरगुजा तक आदिवासियों के जल, जंगल और जमीन से जुड़े अधिकारों की अनदेखी की जा रही है। कांग्रेस पार्टी आदिवासियों के अधिकारों और उनके कथित उत्पीड़न के खिलाफ सड़क से सदन तक लड़ाई लड़ेगी।




