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रायपुर में JCCJ का अनोखा प्रदर्शन, ‘ज्ञानू-जानू विवाह’ के जरिए चुनाव आयोग पर साधा निशाना अमित जोगी के नेतृत्व में निकली विरोध बारात, मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग

रायपुर, 10 अक्टूबर 2026। जनता कांग्रेस छत्तीसगढ़ (जे) ने मतदाता सूचियों में कथित अनियमितताओं और वोट चोरी के आरोपों को लेकर राजधानी रायपुर में अनोखे अंदाज में विरोध प्रदर्शन किया।

पार्टी के प्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी के नेतृत्व में निकाले गए इस प्रदर्शन में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के मुखौटों के जरिए प्रतीकात्मक ‘ज्ञानू-जानू विवाह’ कराया गया। पार्टी ने मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग भी उठाई।

पार्टी नेताओं और कार्यकर्ताओं ने सुभाष स्टेडियम से शास्त्री चौक स्थित मुख्य निर्वाचन कार्यालय तक विरोध रैली निकालने का प्रयास किया। बैंड-बाजे और विवाह की प्रतीकात्मक रस्मों के साथ निकाली गई इस विरोध बारात के जरिए केंद्र सरकार और निर्वाचन आयोग के बीच कथित निकटता पर राजनीतिक व्यंग्य किया गया।

मोतीबाग के पास पुलिस ने रोका प्रदर्शनविरोध रैली जब मोतीबाग के पास पहुंची, तो पुलिस प्रशासन ने प्रदर्शनकारियों को आगे बढ़ने से रोक दिया। इसके बाद कार्यकर्ताओं ने वहीं सड़क पर प्रतीकात्मक रूप से ‘ज्ञानू और जानू का विवाह’ संपन्न कराया और निर्वाचन आयोग की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाते हुए अपना विरोध दर्ज कराया।

‘जनता के वोट के साथ खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं’ — अमित जोगीप्रदेश अध्यक्ष अमित जोगी ने आरोप लगाया कि देश में पिछले दस वर्षों से वोट चोरी होती रही है और लोकतंत्र की निष्पक्षता पर सवाल खड़े हो रहे हैं। उन्होंने अपने प्रदर्शन को राजनीतिक व्यंग्य का माध्यम बताते हुए कहा कि लोकतंत्र की आत्मा जनता का वोट है और उसके साथ किसी भी तरह का खिलवाड़ बर्दाश्त नहीं किया जाएगा।

अमित जोगी ने कहा कि भारत का लोकतंत्र संविधान और जनता के विश्वास पर टिका है। गरीब, किसान, मजदूर, युवा और समाज के अंतिम पंक्ति में खड़े व्यक्ति को मतदान के माध्यम से अपनी सरकार चुनने का अधिकार मिला है। यदि मतदान की निष्पक्षता पर सवाल उठते हैं, तो इससे लोकतंत्र के प्रति जनता के विश्वास को नुकसान पहुंचता है।उन्होंने मतदाता सूचियों में कथित गड़बड़ियों और वोट चोरी से जुड़े आरोपों की पारदर्शी एवं निष्पक्ष जांच की मांग करते हुए कहा कि निर्वाचन आयोग जैसी संवैधानिक संस्था की विश्वसनीयता बनाए रखना लोकतंत्र के लिए बेहद जरूरी है।

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