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राजनीतिक कुण्ठा से ग्रस्त कांग्रेस अब विकास योजनाओं को लेकर भी भ्रम फैला रही : भाजपा प्रदेश प्रवक्ता शिवनारायण पाण्डेय

रायपुर। भारतीय जनता पार्टी के प्रदेश प्रवक्ता शिवनारायण पाण्डेय ने कांग्रेस द्वारा रायपुर विकास प्राधिकरण और वरिष्ठ मंत्री केदार कश्यप पर लगाए गए आरोपों को पूरी तरह निराधार, मनगढ़ंत और राजनीतिक कुण्ठा से प्रेरित करार दिया है। पाण्डेय ने गुरुवार को यहाँ एकात्म परिसर स्थित भाजपा कार्यालय में आयोजित पत्रकार वार्ता में कहा कि कांग्रेस विकास योजनाओं पर तथ्यहीन विवाद खड़ा कर जनता के बीच भ्रम का वातावरण तैयार करने की कोशिश कर रही है।

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता श्री पाण्डेय ने कांग्रेस ने अपनी प्रेस कॉन्फ्रेंस और उससे पहले कांग्रेस चिकित्सा प्रकोष्ठ के संयोजक ने कुछ आक्षेप अखबारों के माध्यम से लगाए। प्रवक्ता पाण्डेय ने कहा कि प्रदेश के वरिष्ठ मंत्री केदार कश्यप का छत्तीसगढ़ के इतिहास में सबसे अधिक काल तक निर्विवाद, निष्कलंक और सबसे ज्यादा समय तक मंत्री रहने का रिकॉर्ड है। एक बड़े आदिवासी नेता के रूप में हैं। श्री पाण्डेय ने कहा कि ​कांग्रेस द्वारा उठाए गए आक्षेपों पर पलटवार करते हुए कहा कि यह सबको ज्ञात है कि यह योजना रायपुर में कोई नई नहीं है।

कमल विहार (अभी कौशल्या विहार) को इसी योजना के तहत लिया गया था। यह भी सबको मालूम है कि एक तो लैंड एक्विजिशन होता है जिसका मुआवजा दिया जाता है और दूसरा यह रहता है कि लैंड को डेवलप करके उसका 40 प्रतिशत भूस्वामी को दिया जाता है और शेष जो है विकास योजनाओं में लगता है और उसको डेवलप किया जाता है। यह दो ही तरीके होते हैं, ​और यह तरीका सिर्फ छत्तीसगढ़ में नहीं, बल्कि देश के अन्य अनेक राज्यों में भी अनियमित शहरीकरण को रोकने के लिए इस प्रकार की योजना चल रही है ताकि परिवहन ठीक रहे, जल निकासी ठीक रहे, ठीक ढंग से लोगों का आवागमन हो।

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता पाण्डेय ने कहा कि रायपुर की दो बड़ी समस्याओं में एक तो ट्रैफिक की बड़ी समस्या रहती है। अब वह जो रोड बनने वाली है, उसकी कनेक्टिविटी एनएच-53 से जोड़ती है। यह रायपुर विकास प्राधिकरण का जो प्रस्तावित मार्ग है एमआर-43 को बलौदाबाजार मार्ग मुख्य मार्ग एनएच-43 से जोड़ती है।

इस योजना से शहर के ट्रैफिक के लिए अच्छा निकास बन जाता है। ​उसमें एक आरोप कांग्रेस की तरफ से यह भी लगाया जा रहा है कि मंत्री केदार कश्यप की पत्नी, जिनकी एक कंपनी राधिका पैलेस प्राइवेट लिमिटेड है और वह उसकी निदेशक हैं, उनकी 1.33 एकड़ ज़मीन कचना में थी और वह ज़मीन इस योजना के तहत लेकर 23 हजार वर्ग फीट ज़मीन एनएच-43 पर दे दी गई है। श्री पाण्डेय ने यह जानना चाहा कि कितने लोगों को इस थरह जमीन दी गई, क्या कांग्रेस ने किसी से पूछा? जो जो छोटे भू-खण्ड हैं, उनके बदले वहीं पास में ज़मीन दी गई है। जिसकी जमीन ज़्यादा है और चूँकि वह व्यावसायिक उपयोग में आ सकती है, ऐसी स्थिति में ट्रांसपोर्टेशन वगैरह के लिए दिक्कत होगी, तो उसका स्थान परिवर्तन होगा ही और उसी गाँव में होगा।

कांग्रेस के लोग बताएँ कि 1.33 एकड़ ज़मीन का जो 40 प्रतिशत होता है, वह ज़मीन कहाँ पर दी जाए?भाजपा प्रदेश प्रवक्ता श्री पाण्डेय ने कहा कि नीतिगत निर्णय यह है कि बड़े भू-खण्ड जो हैं, उसको उसको ऐसी जगह दिया जाए जहां ट्रांसपोर्टेशन की आमतौर पर सुविधा हो। ​और यह कोई भारतीय जनता पार्टी ने मंत्री को नहीं दिया है। कांग्रेस के लोग रिकॉर्ड उठाकर देखें कि उसमें एक आनंद कुकरेजा हैं। उनको तो वहाँ पर तीन गुना ज्यादा यानी 80 हजार वर्गफीट जमीन मिली है। भविष्य में वह जमीन व्यावसायिक कॉम्प्लेक्स के लिए अगर उपयोग होगी तो ट्रांसपोर्टेशन बाधित नहीं होगा। जिस उद्देश्य को लेकर एक टाउनशिप डेवलप हो रही है, जो इन्फ्रास्ट्रक्चर बन रहा है, उसको वही समस्या फिर छोड़के जाएँ, यह बुद्धिमानी का काम नहीं है। श्री पाण्डेय ने कहा कि मंत्री केदार कश्यप की पत्नी की कंपनी है, वह कोई मास्टर प्लान के अंतर्गत यह सारी चीज़ें हुई हैं। मास्टर प्लान के बाद वह जमीन खरीदी गई, ऐसी कोई बात नहीं है। जमीन पहले से रही है।

मास्टर प्लान बना, 21 में उसका रिन्यूअल किया गया। अब कांग्रेस ने तो एक ईंट भी रायपुर में रखने की कभी कोशिश नहीं की। शहर को अव्यवस्था के आलम में 5 वर्षों तक धकेल कर रखा था। जो भी इन्फ्रास्ट्रक्चर रायपुर की शक्लो-सूरत दिख रही है, वह भाजपा की सरकार में दिख रही है और अभी भी उसी संकल्प के साथ आरडीए ने पूरी योजना बनाई है। इसमें नगर निवेश के अंतर्गत जो है यह यह योजना चल रही है।भाजपा प्रदेश प्रवक्ता पाण्डेय ने कहा कि इस योजना में सिर्फ केदार कश्यप को जमीन नहीं दी गई, बल्कि 17 लोग ऐसे हैं, जिनकी ज्यादा जमीन थी और वह जमीन वहाँ पर व्यवस्थित करने की कोशिश की गई है। कांग्रेस नेता हैं कुकरेजा के तो वहाँ छह रकबे हैं, छह-सात रकबा उनका और अलग-अलग जगहों पर रहा, सबको मिलाकर दिया गया। मंत्री कश्यप की छवि बिगाड़ने की नीयत से इस प्रकार के सवाल उठाकर कांग्रेस द्वारा उनके राजनीतिक जीवन को कलंकित करने की कोशिश करना शोभा नहीं देता।

केदार कश्यप को नियमों के विपरीत जमीन नहीं दी गई है। उनसे तीन गुना अधिक जमीन उसी जगह पर, उसी रोड पर, उतनी ही दूरी पर उनको कंपनसेट करके टोटल लैंड का 40 प्रतिशत दिया गया है। 17 लोग ऐसे हैं जिनकी ज्यादा जमीनें थीं। श्री पाण्डेय ने कहा कि नीतियों का ठीक ढंग से, विकास की नीतियों का, नगर नियोजन का कांग्रेस ने ठीक से अध्ययन नहीं किया है और सिर्फ आरोप लगाने की राजनीति करते हैं, सस्ती लोकप्रियता अर्जित करने की कोशिश करते हैं और इस प्रकार के भ्रम का वातावरण पैदा करते हैं। कांग्रेस ने जितने घोटाले किए, उस घोटाले को ढँकने ने के लिए सिर्फ आरोप की राजनीति कांग्रेस कर रही है।

भाजपा प्रदेश प्रवक्ता श्री पाण्डेय ने कहा कि कांग्रेस ने जितने चार-पाँच सवाल खड़े किए थे, एक तो पहला यह था कि ऐसा क्यों दिया गया? दूसरा, अंतिम भू-खण्ड देना था। 1.33 का एक चौथाई वहीं देना चाहिए। कांग्रेसी खुद ही बता रहे हैं, एडमिटेड फैक्ट है कि वहाँ जो रोड है वह कितने मीटर की, बहुत पतली गली है, यह खुद कांग्रेस के आरोप हैं। सँकरी गली से व्यावसायिक उपयोग उसका नहीं हो सकता, तो ऐसी स्थिति में पॉलिसी के तहत ही वह जो है उस जमीन उनको मिली। कांग्रेस ने कहा कि इसकी वैल्यूएशन बढ़ जाती है।

स्वाभाविक रूप से जब जमीन डेवलप होती है तो उसका रकबा कम होता है, लेकिन उससे वैल्यूएशन तो बढ़ती है क्योंकि इन्फ्रास्ट्रक्चर वहाँ डेवलप हो जाता है और उसकी कीमत उन्होंने आकलन कर ली। कांग्रेस के लोग पता नहीं क्या भूमि का व्यापार करते हैं क्या? 20 करोड़ का उसका उन्होंने आकलन बता दिया, तो ज़रा कुकरेजा के बारे में अपने नेता के बारे में बता दें जिनकी करीब 80 हजार स्क्वायर फीट ज़मीन भी आती है, तो उसका वैल्यूएशन तो अरबों में चला जाएगा। पाण्डेय ने कहा कि इस प्रकार का आकलन मिथ्या, कपोल कल्पित है और इसका कोई अर्थ नहीं है।भाजपा प्रदेश प्रवक्ता श्री पाण्डेय ने कंपनी की ज़मीन को योजना में शामिल करने पर कांग्रेस के आक्षेप पर कहा कि व्यवस्थित शहर बनाने के बारे में कांग्रेस ने कभी विचार नहीं किया है। सिर्फ आरोप लगाओ, लोगों को भ्रम में डालो और उसके लिए राजनीति की फसल तैयार करो और उसको काटो, कांग्रेस का एकमात्र उद्देश्य यही दिखता है।

नियमों का कहीं स्पष्टतः कोई उल्लंघन हुआ हो, नियमों को कहीं दरकिनार रखा गया हो, पॉलिसी किसी आदमी के हित में सिर्फ उसको लाभ पहुँचाने के लिए कांग्रेस के इस प्रकार का कोई भी तथ्य सामने नहीं रखा। यह जो भी आरोप हैं, यह राजनीतिक कुण्ठा का परिणाम है। राजनीतिक कुण्ठा के कारण ही और कांग्रेस इस प्रकार का आरोप लगा रही है। इसमें किसी तरह का कोई तथ्य नहीं है। जो भी है वैधानिक है और वैधानिकता के आधार पर नगर निवेश और नगर का डेवलपमेंट आरडीए कर रही है। जहाँ तक मंत्री पर आरोप लगाने का सवाल है, उसके पीछे शुद्ध और शुद्ध राजनीतिक कुण्ठा है कांग्रेस की, इसके अलावा कुछ नहीं।

*विकास योजना के तहत भू-खण्डों का विस्थापन नियमानुसार, कांग्रेस के आरोप निराधार : आरडीए उपाध्यक्ष डॉ. जे.पी. शर्मा*रायपुर विकास प्राधिकरण के उपाध्यक्ष डॉ. जे.पी. शर्मा ने इससे पहले पत्रकार वार्ता को सम्बोधित करते हुए.स्पष्ट किया कि नगर वन क्षेत्र में विकास योजना के प्रावधानों के अंतर्गत मार्ग संरचना में आने वाले भू-खण्डों का विस्थापन पूरी तरह नियमानुसार किया गया है।

डॉ. शर्मा ने बताया कि यह क्षेत्र प्रवास क्षेत्र है, जहाँ बड़ी संख्या में पेड़-पौधे हैं। एनजीटी की गाइडलाइन के अनुसार जहाँ जल स्रोत हैं, वहाँ विकास कार्य नहीं किया जा सकता और उसे यथास्थिति में रखा जाना है। इसी के तहत वहाँ के भू-खण्डधारियों को दूसरी जगह पर विस्थापित कर भू-खण्ड आवंटित किए गए हैं।राविप्रा उपाध्यक्ष डॉ. शर्मा ने बताया कि समस्त भू-स्वामियों के अनियमित आकार के भू-खण्डों को नियमित आकार देकर विस्थापित किया गया है, ताकि उन्हें बेहतर भू-खण्ड मिल सके।

अनियमित भू-खण्डों को आरडीए ने अपने पास रखा है। साथ ही तकनीकी व्यवस्था के तहत जिस भू-स्वामी का जो गाँव है, उसी गाँव में उसे भू-खण्ड का आवंटन किया गया है, ताकि किसी को कोई परेशानी न हो।राविप्रा उपाध्यक्ष डॉ. शर्मा ने बताया कि 2000 वर्गमीटर से बड़े भू-खण्डों को सड़क किनारे आवंटित किया गया है, ताकि भविष्य में वहाँ मॉल, शॉपिंग कॉम्प्लेक्स जैसी बड़ी योजनाएँ आ सकें और परिवहन के लिए बेहतर एंट्री-एग्जिट व्यवस्था सुनिश्चित हो।

वहीं 1000 वर्गमीटर या उससे छोटे भू-खण्डों को पीछे की ओर आवंटित किया गया है। यह पूरी प्लानिंग व्यवस्थित विकास को ध्यान में रखकर की गई है।राविप्रा उपाध्यक्ष डॉ. शर्मा ने कांग्रेस के आरोपों को सिरे से खारिज करते हुए कहा कि किसी को विशेष रूप से चिह्नित कर भू-खण्ड नहीं दिया गया है। भू-खण्डों का आवंटन चेहरा देखकर नहीं, बल्कि नियमानुसार और पारदर्शी प्रक्रिया के तहत किया गया है।इस दौरान पत्रकार वार्ता में भाजपा प्रदेश मीडिया सह संयोजक गोविन्दा गुप्ता भी मौजूद रहे।

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