
महासमुंद, 25 सितंबर 2026। महासमुंद पुलिस ने छत्तीसगढ़ और ओडिशा में सक्रिय बताए जा रहे मानव तस्करी के एक बड़े सिंडिकेट का खुलासा करते हुए बड़ी कार्रवाई की है। मामले में नाबालिगों की तस्करी, बाल मजदूरी, बंधुआ मजदूरी और नाबालिग बालिकाओं के शोषण से जुड़े गंभीर आरोप सामने आए हैं। कार्रवाई में नुआपाड़ा पुलिस ने भी सक्रिय सहयोग किया।
पुलिस के अनुसार, छत्तीसगढ़ से तस्करी कर ले जाए गए एक नाबालिग के शारीरिक शोषण और गर्भवती होने संबंधी अस्पताल मेमो के बाद मामले की जांच शुरू हुई। जांच आगे बढ़ने पर कथित मानव तस्करी नेटवर्क और उसके कई ठिकानों का पता चला।
पुलिस ने ओडिशा और छत्तीसगढ़ में सिंडिकेट से जुड़े 10 ठिकानों पर दबिश दी। इस दौरान 1 करोड़ 48 लाख 54 हजार 750 रुपये नकद बरामद किए गए। इसके अलावा मजदूर पलायन रजिस्टर और डायरी, मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, चेकबुक, एटीएम कार्ड समेत बड़ी संख्या में दस्तावेज और इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य जब्त किए गए।
पुलिस का दावा है कि जब्त दस्तावेजों की जांच में हजारों बालिग और नाबालिग मजदूरों के कथित अवैध परिवहन तथा बंधुआ मजदूरी से जुड़े डिजिटल और कागजी साक्ष्य मिले हैं।
मामले में पुलिस ने मुकेश चंद्राकर, लता सबर, नंदू मोहंती, पीयूष अग्रवाल और मनीष गुप्ता को गिरफ्तार किया है। पुलिस के मुताबिक, आरोपियों के ठिकानों से मिले रजिस्टर और दस्तावेजों में प्रति वर्ष बड़ी संख्या में मजदूरों को बिना वैध सरकारी अनुमति और दस्तावेजों के विभिन्न राज्यों में ईंट भट्ठों पर ले जाने और महीनों तक काम कराने का विवरण मिला है।
जांच में यह भी सामने आया है कि कथित सिंडिकेट द्वारा मजदूरों को अग्रिम राशि देने के साथ-साथ डर और दबाव का इस्तेमाल किए जाने तथा महिलाओं और नाबालिग बच्चों को भी तस्करी के नेटवर्क में शामिल करने के आरोप हैं।
फिलहाल पुलिस आरोपियों के मोबाइल सीडीआर, बैंक खातों और अन्य डिजिटल साक्ष्यों की जांच कर रही है। पुलिस का कहना है कि मामले में जुड़े अन्य लोगों तक पहुंचने के लिए एंड-टू-एंड कार्रवाई की जाएगी।
मामला थाना खल्लारी अपराध क्रमांक 104/2026 में BNS की धारा 143(2), 143(3), 143(4) और 3(5) के तहत दर्ज किया गया है। जांच के दौरान BNS की धारा 111 (संगठित अपराध) भी जोड़ी गई है।




